किसान वो
🌹 नमस्कार 🌹
प्रस्तुत कविता उस व्यक्तित्व को केंद्र में रखकर लिखी गयी है। जो अपनी समस्याओं को जानते हुए भी ,जन कल्याण की भावना से कार्य करता है।,,,,,,वह है एक 'साधारण किसान',,,,
वह यह जानता है कि बारिश होने पर मेरे घर के छप्पर से सबसे पहले पानी टपकेगा , परन्तु फिर भी वह बारिश होने की इच्छा रखता है।
सचमुच किसान ,बिधाता की सबसे सच्ची सेवा करता है। विधाता ने पेड़ पौधे बनाये और किसान भी पेड़ ,पौधे लगाता है। इस प्रकार वह उस परम पिता की सेवा करता है,,,,,
🌸 🌸🌸🌸🌸
देख जब बादल,
घुमड़ते हैं आसमान,
फूला न समाता है,
प्यारा सा किसान वो।
कर्मयोगियों कि भांति,
दिन रात मेहनत ,
कर पालता है,
परिवार इंसान वो।
🌼🌼
सृष्टा के काजों में,
करके सहायता प्यारे,
बन जाता है,
अन्नदाता भगवान वो।
टिप टिप वाला घर,
भूलकर रोज रोज,
ताकता ही रहता,
मेघ युक्त आसमान वो।
🌼🌼
दिनभर रातभर,
जगा थका भूखा रह,
रखवाली में पड़े,
खेत खलिहान वो।
खुद को तो शायद,
सूखीरोटीही नसीब हो,
पर कर देता,
राष्ट्र में अन्नदान वो।
🌼🌼
फसल उगाकर नित,
लगाकर पेड़ पौधे,
करता है राष्ट्र में,
शक्ति आह्वान वो।
ऐसे चलता है,
विधाता पग चिन्हों पर,
किन्तु मन में न कभी,
लाता अभिमान वो।
🌼🌼
मेरे देशवासी आज,
आशू यही चाहता,
कभी न बने ,
राजनीति सामान वो।
यही गुजारिश मेरी
हर देशवासी से,
शान से किसान को,
आज सम्मान दो।।
🌼🌼🌸🌸🌹🌹
-------धन्य बाद------
कृपया अपने सुझाव अवश्य दें,,,,,,,,,,,,
प्रस्तुत कविता उस व्यक्तित्व को केंद्र में रखकर लिखी गयी है। जो अपनी समस्याओं को जानते हुए भी ,जन कल्याण की भावना से कार्य करता है।,,,,,,वह है एक 'साधारण किसान',,,,
वह यह जानता है कि बारिश होने पर मेरे घर के छप्पर से सबसे पहले पानी टपकेगा , परन्तु फिर भी वह बारिश होने की इच्छा रखता है।
सचमुच किसान ,बिधाता की सबसे सच्ची सेवा करता है। विधाता ने पेड़ पौधे बनाये और किसान भी पेड़ ,पौधे लगाता है। इस प्रकार वह उस परम पिता की सेवा करता है,,,,,
🌸 🌸🌸🌸🌸
देख जब बादल,
घुमड़ते हैं आसमान,
फूला न समाता है,
प्यारा सा किसान वो।
कर्मयोगियों कि भांति,
दिन रात मेहनत ,
कर पालता है,
परिवार इंसान वो।
🌼🌼
सृष्टा के काजों में,
करके सहायता प्यारे,
बन जाता है,
अन्नदाता भगवान वो।
टिप टिप वाला घर,
भूलकर रोज रोज,
ताकता ही रहता,
मेघ युक्त आसमान वो।
🌼🌼
दिनभर रातभर,
जगा थका भूखा रह,
रखवाली में पड़े,
खेत खलिहान वो।
खुद को तो शायद,
सूखीरोटीही नसीब हो,
पर कर देता,
राष्ट्र में अन्नदान वो।
🌼🌼
फसल उगाकर नित,
लगाकर पेड़ पौधे,
करता है राष्ट्र में,
शक्ति आह्वान वो।
ऐसे चलता है,
विधाता पग चिन्हों पर,
किन्तु मन में न कभी,
लाता अभिमान वो।
🌼🌼
मेरे देशवासी आज,
आशू यही चाहता,
कभी न बने ,
राजनीति सामान वो।
यही गुजारिश मेरी
हर देशवासी से,
शान से किसान को,
आज सम्मान दो।।
🌼🌼🌸🌸🌹🌹
-------धन्य बाद------
कृपया अपने सुझाव अवश्य दें,,,,,,,,,,,,
Good job,,
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