प्रेम की कविता,,,,
🌸नमस्कार🌸
प्रस्तुत है आशू की एक सुन्दर प्रेम की कविता,,,,,
🌸 प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कुछ उपलब्धियों,साधनों, भौतिक या अभौतिक वस्तुओं आदि को पाना चाहता है , अतएव प्रस्तुत कविता इस धारणा पर ही आधारित है,,,,,,
🌸🌹🌼
तुम मस्त लटों के गहरे वन,
चांदनी लपेटे आ जाओ।
संपूर्ण चमन के फूलों की ,
खुशबु को समेटे आ जाओ ।
🌸🌹🌼
तेरे होंठ पे फूलों को रख दें,
तो फूल तुरत मुरझा जाए।
गालों का रंगभवन देखे,
भंवरों का दल इठला जाए।
मेरे दिल की अंगड़ाई को,बाहों में समेटने आ जाओ।
तुम मस्त लटों,,,,,,,,,
🌸🌹🌼
दिल प्यासा बैठा है मेरा,
तू बदली बनके आ जाए।
बिरह बन खोया जाता हूँ,
बाहों का सहारा मिल जाए।
तन मन की तपन से व्याकुल हूँ,
शीतल पुरवा महका जाओ।
तुम मस्त लटों,,,,,,
🌸🌹🌼
आँखें नजरें मोहनी तीर,
जो देखे बिंधा चला आये ।
जुल्फें हैं लहरती प्रेमपाश,
कोई भी न बचके जा पाए।
जीवन, पतझड़ ने घेर लिया,
रति बसन्तिका बन आ जाओ।
तुम मस्त लटों,,,,,,
🌸🌹🌼
बेचैन पड़ा तेरी यादों में,
आओ तो नींद भी आ जाए।
घायल गम के घावों से हूँ,
तेरी धड़कन मरहम बन जाए।
बस यही ख्वाहिश-ए-दिल मेरी,
आओ एक बार चले आओ।
तुम मस्त लटों,,,,,,,,
🌸🌹🌼
तुम आ जाओ तो रात बने,
तुम आ जाओ तो बात बने।
जीवन पथ पर इकला मैं चला,
तुम आ जाओ तो साथ बने।
तारे गिन गिन कटतीं रातें,
सुनहरे सपन बन आ जाओ।
तुम मस्त लटों,,,,,,,
🌸धन्यवाद🌸
आप जो चाहते हों उसी भाव से कविता का रसास्वादन करके ,सुझाव दें।
Please comment and share,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
प्रस्तुत है आशू की एक सुन्दर प्रेम की कविता,,,,,
🌸 प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कुछ उपलब्धियों,साधनों, भौतिक या अभौतिक वस्तुओं आदि को पाना चाहता है , अतएव प्रस्तुत कविता इस धारणा पर ही आधारित है,,,,,,
🌸🌹🌼
तुम मस्त लटों के गहरे वन,
चांदनी लपेटे आ जाओ।
संपूर्ण चमन के फूलों की ,
खुशबु को समेटे आ जाओ ।
🌸🌹🌼
तेरे होंठ पे फूलों को रख दें,
तो फूल तुरत मुरझा जाए।
गालों का रंगभवन देखे,
भंवरों का दल इठला जाए।
मेरे दिल की अंगड़ाई को,बाहों में समेटने आ जाओ।
तुम मस्त लटों,,,,,,,,,
🌸🌹🌼
दिल प्यासा बैठा है मेरा,
तू बदली बनके आ जाए।
बिरह बन खोया जाता हूँ,
बाहों का सहारा मिल जाए।
तन मन की तपन से व्याकुल हूँ,
शीतल पुरवा महका जाओ।
तुम मस्त लटों,,,,,,
🌸🌹🌼
आँखें नजरें मोहनी तीर,
जो देखे बिंधा चला आये ।
जुल्फें हैं लहरती प्रेमपाश,
कोई भी न बचके जा पाए।
जीवन, पतझड़ ने घेर लिया,
रति बसन्तिका बन आ जाओ।
तुम मस्त लटों,,,,,,
🌸🌹🌼
बेचैन पड़ा तेरी यादों में,
आओ तो नींद भी आ जाए।
घायल गम के घावों से हूँ,
तेरी धड़कन मरहम बन जाए।
बस यही ख्वाहिश-ए-दिल मेरी,
आओ एक बार चले आओ।
तुम मस्त लटों,,,,,,,,
🌸🌹🌼
तुम आ जाओ तो रात बने,
तुम आ जाओ तो बात बने।
जीवन पथ पर इकला मैं चला,
तुम आ जाओ तो साथ बने।
तारे गिन गिन कटतीं रातें,
सुनहरे सपन बन आ जाओ।
तुम मस्त लटों,,,,,,,
🌸धन्यवाद🌸
आप जो चाहते हों उसी भाव से कविता का रसास्वादन करके ,सुझाव दें।
Please comment and share,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
Very nice,,,
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